ॐ भूर्भुवः स्वः' गायत्री मंत्र का एक भाग है. इसका अर्थ है- ' हमारे मन को जगाने की अपील करते हुए हम माता से प्रार्थना करते हैं कि वह हमें शुभ कार्यों की ओर प्रेरित करे '. 'ॐ भूर्भुवः स्वः' के शब्दों के अर्थ: ॐ - आदि ध्वनि, भूर् - भौतिक शरीर या भौतिक क्षेत्र, भुव - जीवन शक्ति या मानसिक क्षेत्र, स्व - जीवात्मा. गायत्री मंत्र के अन्य शब्दों के अर्थ: तत् - वह (ईश्वर) सवितुर - सूर्य, सृष्टिकर्ता (सभी जीवन का स्रोत) वरेण्यं - आराधना भर्गो - तेज (दिव्य प्रकाश) देवस्य - सर्वोच्च भगवान धीमहि - ध्यान धियो - बुद्धि को यो - जो नः - हमारी प्रचोदयात् - शुभ कार्यों में प्रेरित करें गायत्री मंत्र के नियमित जाप से मन शांत और एकाग्र रहता है. मान्यता है कि इस मंत्र का लगातार जपा जाए, तो इससे मस्तिष्क का तंत्र बदल जाता है.
ऋषि मारकंडे ने पूछा जमी ।
दया करके ब्रह्मा जी बोले तभी।
कि जो गुप्त मन्त्र है संसार में। हैं सब शक्तियां जिसले अधिकार में।
हर इक का जो कर सकता उपकार है।
जिसे जपने से बेड़ा ही पार है। पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का । जो हर काम पूरा करे सवाली का । मैं नव दुर्गा के नाम बतलाता हूँ। कवच की मैं सुन्दर चौपाई बना।
सुनो मारकंडे मैं समझाता हूँ।
जो अत्यन्त है गुप्त देऊं बता ।
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